रविवार, 11 फ़रवरी 2024

भारतीय राजनिति और धर्म

आज की ख़ास पेशकश में मैं राजनीति और धर्म को अलग अलग करके भारतीय आम लोगो के मानसिकता को बताने की कोशिश कर रहा हूं।

भारत में धर्मो के आधार पे जनसंख्या देखी जाए तो, करीब 80% हिंदू, 14% मुस्लिम, 2.30% क्रिशचन और करीब 2% सिख समुदाय के लोग रहते है।



अब अलग अलग धर्म के मान्यताओं के अनुसार धर्म को समझने की कोशिश करते है।

सनातन के हिसाब से शास्त्रों में धर्म का अर्थ सदाचार, अच्छा काम करना है। धर्म सबका अलग अलग होता है जैसे पुत्र के लिए जो अच्छा करना है वो पिता का धर्म है। धर्म किसी वर्ग, समुह को नहीं कहते है। धर्म शब्द का अर्थ religion नही है। religion का अर्थ पंथ, संप्रदाय है। धर्म को english में to work good कहते है।

धर्म का शाब्दिक अर्थ होता है, 'धारण करने योग्य' या यूं कह लें कि "मानवता ही धर्म है।"

"बस इस दुनिया में धर्म ही है जो एक जीव को एक जानवर से अलग बनाता है"


हमारा भारत विकाश पथ पर अग्रसर एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां सारे धर्म के लोगों को समान अधिकार दिए जाते है। और यह लगभग सभी विकसित देशों में आम बात है।(चाइना को छोड़ कर)


पर बीजेपी और उसके सहयोगियों के सत्ता में आने से भारत में कट्टरता अपना पैर पसार चुका है और यह एक कड़ी है जहां से भारतीय राजनीति, धर्म से जुड़ के भारतीय लोगो को आपस में लड़ा रहे है।

भारत में कट्टरता सुरू कुछ ऐसे होता है 
दुनिया अभी तक इस्लामिक कट्टरता का शिकार हुई थी जगह जगह मानवता को कुचला जा रहा था।

पर यह सुरू कैसे होता है, ये कोई समझने की कोशिश नहीं करता। कट्टरता के शिकार कितने ही सारे देश है जो हर रोज आपस में अपने ही लोगो को मार देते है। एक देश बनता है उनके लोगो से भारत में रहने वाले हम जैसे आम लोग वो मुस्लिम भी हो सकते है, हिंदू भी हो सकते है, जिनके लिए धर्म मानवता है और मानवता से जुड़े लोग एक ही धर्म के लोग, हा मानवता को पाने का तरीका सनातनी,सिख,इस्लामिक कैसी भी हो सकती है।

राजनीतिक पार्टियों के नजरिए से देखें तो

हिंदू धर्म के मानने वाले कट्टर लोग-

यहां कुछ लोग (राजनीतिक दल, नेता, कोई भी लाइम लाइट वाला चेहरा) जिनका काम अपनी रोटी सेकना है वो अपने फ़ायदे के लिए धर्म को ढाल बना के लोगो को ये यकीन दिलाते है कि देख भाई तेरा धर्म संकठ में है और उसका कारण सारी दुनिया को पता है, क्योंकि इस्लामिक कट्टरता कितने ही देशों को बर्बाद कर गई है।

 अब दो चीजे दिमाग में आती है बात तो सही है इराक़, गाजा, तालिबान, पाकिस्तान कितने सारे देश तो जानते है हम। हमे लगता है कि ये तो हमारी मान्यताओं के ऊपर कुछ संकट आया है और उसे बचाना है और ये डर कुछ हद तक ठीक भी है। हमे डर है इस लिए बचाना है पर सनातन तो कहता है किसी को डरा कर समझाने से अच्छा है कि उसे सनातन की खूबसूरती, सनातन के प्यार से समझाओ। सत्य, अहिंसा,रिश्ते के ढाल से समझाओ।
हमारी संस्कृति एक है हमारा रहन सहन एक है हम काफी हद तक एक है बस अब मानवता को मानने का तरीका अलग अलग हो गया है।


सरकार को एक नई कानून व्यवस्था के तहत सभी तरह के धर्म से जुड़े किसी भी प्रकार की गतिविधियों को मॉनिटर करनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सज़ा देनी चाहिए।

अगली कड़ी में मुस्लिम कट्टर लोग-


To be continued....






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